Chand Kab Niklega Live आज सकट चौथ के चांद ने दिए दर्शन, सकट चौथ का चांद पटना, वाराणसी, रांची, कोलकाता, लखनऊ समेत कई शहरों में निकल गया है। और बात करे तो अभी नई दिल्ली, नोएडा, लखनऊ समेत कुछ शहरों में चांद दार्शन बाकी है।
Sakat Chauth 2026 Moon Time, सकट चौथ व्रत 2026, Moonrise Today
Sakat Chauth 2026 (आज चांद कब दिखेगा) :
करवा चौथ की तरह ही सकट चौथ व्रत भी चांद की पूजा के साथ पूरा होता है। यही कारण है कि महिलाओं को शाम की पूजा के बाद से ही चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है। चांद की पूजा से पहले महिलाएं सकट चौथ की कथा सुनती हैं। फिर जब आसमान में चांद दिखाई देने लगता है तो सबसे पहले चांद को जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य अर्पित करती हैं। फिर तिल और गुड़ के लड्डू का भोग लगाती हैं और चांद की आरती उतारती हैं। इसके बाद महिलाएं जल पीकर सकट व्रत का पारण कर लेती हैं।
आज चांद कितने बजे निकलेगा समय 2026 (Sakat Chauth 2026 Moon Time) :
- लखनऊ – 08:41 pm
- कोटा – 09:04 pm
- पटना – 08:25 pm
- जम्मू – 08:59 pm
- कोलकाता – 08:15 pm
- मुंबई – 09:23 pm
- जयपुर – 09:02 pm
- गाजियाबाद – 08:53 pm
- रांची – 08:27 pm
- नोएडा – 08:54 pm
- नई दिल्ली – 08:54 pm

सकट चौथ का चांद न दिखे तो कैसे पूरा करें व्रत ?
बादल या मौसम की वजह से चांद दिखाई नहीं देता। अगर आपके यहां भी ऐसा ही हो रहा है तो आप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके पूरी श्रद्धा के साथ अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा कर सकती हैं। इस दौरान मन में चंद्र देव का ध्यान जरूर करें।
अगर चांद 9 बजकर 30 मिनट तक दिखाई नहीं देता है तो आप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके चंद्र देव का ध्यान करके अर्घ्य दे सकते हैं। कई बार बादल लगे होने की वजह से चांद दिखाई नहीं देता है। ऐसे में आप चंद्र देव का ध्यान करके पूजा संपन्न कर सकते हैं।
चांद सबसे पहले पटना, इसके बाद रांची, फिर नोएडा, दिल्ली में दिखाई देगा। सभी शहरों में चांद दिखने के समय में थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिलेगा।
आज दिल्ली में चांद रात 8 बजकर 54 मिनट पर दिखने की उम्मीद है। वहीं नोएडा और गाजियाबाद में भी इसी समय के आस-पास चांद दिखाई दे सकता है।
चांद निकलने के बाद सबसे पहले चांद को अर्घ्य दें। इस बात का ध्यान रखें कि चांद को अर्घ्य देने वाले जल में थोड़ा सा गंगाजल, थोड़ा कच्चा दूध, सफेत तिल, अक्षत और फूल जरूर होना चाहिए। अर्घ्य के बाद चांद को धूप-दीप दिखाएं। इसके बाद भोग लगाकर तीन बार परिक्रमा की जाती है।













